Biography of Kabir Saheb
कबीर साहेब की जीवनी कबीर परमेश्वर विक्रम संवत् 1455 ई. (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को सूर्य उदय से 1/ 1:30 घण्टे पहले जिसे ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं, उस समय परमेश्वर अपने सत्यलोक से गति करके (चलकर) आए और उस लहरतारा सरोवर में कमल के फूल के ऊपर शिशु रूप धारण करके विराजमान हुए। उस समय एक अष्टानन्द नामक ऋषि जो स्वामी रामानन्द जी ब्राह्मण का शिष्य था, उस सरोवर में प्रतिदिन की तरह स्नान करके एकान्त स्थान पर शांत वातावरण में साधना कर रहा था। वहाँ पर वह ऋषि एक घण्टा प्रतिदिन साधना-स्मरण करता था। जब परमेश्वर कबीर जी सत्यलोक से नीचे अवतरित हो रहे थे तो उनके शरीर का दिव्य प्रकाश अष्टानन्द जी को दिखाई दिया। वह एक प्रकाश का गोला रूप में दिखा। अष्टानन्द ऋषि जी की चर्म दृष्टि उस प्रकाश की चमक को सहन न कर सकी। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली। बंद आँखों में एक बालक दिखाई दिया। फिर आँखें खोली तो वह प्रकाश लहर तारा जलाशय में समाता हुआ दिखाई दिया और सरोवर के सर्व कमल स्पष्ट दिखाई दिए, परंतु क्षण (सैकंड) मात्रा में फिर अंधेरा हो गया, परंतु अष्टानन्द जी की आँखों के सामने शिशु का प्रकाश रहित आकार फिर भी ...