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How beneficial is the fasting of Shivaratri

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शिवरात्रि का व्रत करना कितना लाभदायक मान्यता है कि जो भी जातक महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं उन्हें नरक से मुक्ति मिलती है और आत्मा की शुद्धि होती है। इस दिन जहां- जहां भी शिवलिंग स्थापित है, उस स्थान पर भगवान शिव का स्वयं आगमन होता है। इसलिए शिव की पूजा के साथ शिवलिंग की भी विशेष आराधना करने की परंपरा है। शिव अपने भक्तों को सच्चे दिल से आशीर्वाद देते हैं। लेकिन गीता अनुसार व्रत रखने से कोई लाभ नहीं हैं। गीता अनुसार व्रत करना कैसा है न, अति, अश्नतः, तु, योगः, अस्ति, न, च, एकान्तम्, अनश्नतः, न, च, अति, स्वप्नशीलस्य, जाग्रतः, न, एव, च, अर्जुन।।16।। श्रीमद्भगवत् गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में मना किया है कि हे अर्जुन! यह योग (भक्ति) न तो अधिक खाने वाले का और न ही बिल्कुल न खाने वाले का अर्थात् यह भक्ति न ही व्रत रखने वाले, न अधिक सोने वाले की तथा न अधिक जागने वाले की सफल होती है। इस श्लोक में व्रत रखना पूर्ण रुप से मना है। संत रामपाल जी महाराज कहते हैं कि व्रत करने से मोक्ष प्राप्त होता है तो अकाल पड़ने पर लोग क्यो मरते हैं। अधिक जानकारी के लिए देखें हमार...

Sant Rampal Ji Maharaj

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संत रामपाल जी महाराज की संघर्ष यात्रा संत रामपाल जी का जन्म 8 सितम्बर 1951 को गांव धनाना जिला सोनीपत हरियाणा में एक किसान परिवार में हुआ। पढ़ाई पूरी करके हरियाणा प्रांत में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजिनियर की पोस्ट पर 18 वर्ष कार्यरत रहे। सन् 1988 में परम संत रामदेवानंद जी से दीक्षा प्राप्त की तथा तन-मन से सक्रिय होकर स्वामी रामदेवानंद जी द्वारा बताए भक्ति मार्ग से साधना की तथा परमात्मा का साक्षात्कार किया। संत रामपाल जी को नाम दीक्षा 17 फरवरी 1988 को फाल्गुन महीने की अमावस्या को रात्राी में प्राप्त हुई। उस समय संत रामपाल जी महाराज की आयु 37 वर्ष थी सन् 1993 में स्वामी रामदेवानंद जी महाराज ने आपको सत्संग करने की आज्ञा दी तथा सन् 1994 में नामदान करने की आज्ञा प्रदान की। भक्ति मार्ग में लीन होने के कारण जे.ई. की पोस्ट से त्यागपत्र दे दिया जो हरियाणा सरकार द्वारा 16.5.2000 को पत्र क्रमांक 3492-3500, तिथि 16.5.2000 के तहत स्वीकृत है। सन् 1994 से 1998 तक संत रामपाल जी महाराज ने घर-घर, गांव-गांव, नगर-नगर में जाकर सत्संग किया। बहु संख्या में अनुयाई हो गये। साथ-साथ ज्ञानहीन संतों...

Who is the real brahmin

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ब्राह्मणों का इतिहास प्राचीन काल में भारत विश्व गुरु कहलाता था। क्योंकि इस भारत भूमि पर अनेक ऋषि मुनि हुए हैं। यहां पर लोगो की धर्म के प्रति रुचि हमेशा से ही रहीं हैं। उस केवल ब्राह्मण वर्ग को ही शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार था। और हिन्दू धर्म के सद् ग्रंथों को ब्राह्मण ही पठन-पाठन किया करते थे। जो भी भक्ति साधना यह बताते थे हिन्दू धर्म के लोग उसको स्वीकार कर लेते थे। असली ब्राह्मण की परिभाषा लेकिन यहां ब्राह्मण का मतलब किसी जाति विशेष से नहीं है। ब्राह्मण का अर्थ है ब्रह्म (परमात्मा) की पहचान करना। अर्थात् ब्राह्मण वहीं है जिसने ब्रह्म को पहचान लिया या जिसको पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति का सही रास्ता मिल गया। असली ब्राह्मण वहीं है जिसको पूर्ण परमेश्वर की जानकारी के साथ पूर्णमोक्ष का मार्ग भी मिले। जिससे मनुष्य इस जन्म मृत्यु से छुटकारा प्राप्त करके अक्षय मोक्ष अर्थात् सतलोक में स्थायी निवास कर सकें। अधिक जानकारी के लिए देखें हमारी वेबसाइट http://www.jagatgururampalji.org