राजनीति और हमारा समाज 

राजनीति का रंग जब जब लाल हुआ है इसने समाज को दो फाड़ ही किया है हिंदुस्तान के इतिहास में ऐसे कहीं तारीख नासूर बन कर आज भी जिंदा है जो हिंदुस्तान के आने वाली नस्लों को चीख चीख कर बताता रहेगा की राजनीति का रंग कैसा होता है समाज में राजनीति का अहम रोल होता है बिना राजनीति समाज की कल्पना नहीं कर सकते हैं लेकिन जब राजनीति का रूप में विषाक्त रूप होता है तो फिर समाज को बांटने में भी उसकी हिस्सेदारी सबसे ज्यादा होती है

 आज के दौर में राजनीति का मतलब सत्ता हो गया है आपको बता दें कि हर सियासत का आधार समाज है अगर समाज चाहे तो सत्ता को एक पल में बदल सकता है लेकिन सियासत यही नहीं चाहता है

 आज के दौर के नेता इसी समाज को बांट कर उस की एकता और अखंडता को खत्म कर देते हैं फिर जाति और वर्ग के नाम पर नफरत फैलाकर सत्ता का रास्ता तय कर रते हैं ऐसे में समाज के अंदर जमकर मानव अधिकार का हनन होता है 

आज के दौर की राजनीति इस कदर बेजुबान हो गई है कि उसका कोई अपना मूल्य नहीं बचता जाति के नाम पर सत्ता थी कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ मानव मूल्यों की अब कोई कदर नहीं है संविधान के हिसाब से जिन चीजों को तय किया गया था वह खत्म होता जा रहा है ऐसे में 
आज की राजनीति तो मानव मूल्यों के खिलाफ हो रही है जो सविधान के लिए खतरा बनता जा रहा है

समाज का स्वरूप 
 आज के समय में मानव समाज में अनेक प्रकार की कुरीतियों का प्रचलन चल रहा है जैसे दहेज प्रथा, जातिगत ऊंच-नीच, भेदभाव आदि समाज में फैली कुरीतियों को जड़ से खत्म करने का काम संत रामपाल जी महाराज कर रहे हैं 
 आओ जाने उस पुस्तक के बारे में जो मानव समाज में फैली बुराइयों को जड़ से खत्म कर दी उस पुस्तक का नाम है "जीने की राह"

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