सत भक्ति से पूर्ण लाभ

सत्य साधना शास्त्रोक्त विधि से करने से परमात्मा के प्रति प्रेम उत्पन्न होता है।


सुमिरन करते समय या परमेश्वर की महिमा सुनने तथा परमात्मा का विचार आने पर प्रभु प्रेम में आंसू बहने लगते हैं। जो पाप कर्म नष्ट होने का प्रतीक है। जैसे तेज वायु चलने से बादल तितर-बितर हो जाते हैं।
सूर्य का प्रकाश स्पष्ट नया ताजा दिखाई देने लगता है इसी प्रकार नाम जाप से उत्पन्न प्रेम की आंधी से आत्मा तथा परमात्मा के सामने से पाप कर्म रूपी बादल तितर-बितर हो जाते हैं फिर परमेश्वर जी दिव्य दृष्टि से दिखाई देते हैं। उनका नूर पहले अगोचर था फिर दिव्य दृष्टि गोचर हुआ उसी परमेश्वर की भक्ति से पूर्ण निर्वाण प्राप्त होता है। वह परमात्मा सत धाम सतलोक में रहता है।

अधिक जानकारी के लिए देखिए हमारी वेबसाइट
http://www.jagatgururampalji.org

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Holy Bible knowledge

How beneficial is the fasting of Shivaratri