मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य


यदि साधक को परमात्मा पर विश्वास ही नहीं है तो नाम सिमरन का कोई लाभ नहीं उसके मानव जीवन को काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार रूपी पाँच चोर मुस(चुरा) रहे हैं।
इन पांचों की पाँच पाँच प्रकृति यानी 25 ये तथा उनके आधीन होकर कोठी बंगले बनाने में, कभी कार गाड़ी खरीदने में जीवन नष्ट कर देता है।
सद्गुण के प्रभाव से पहले तो किसी पर दया करके बिना सोचे समझे लाखों रुपए खर्च कर देता है। फिर उसमें त्रुटि देखकर तमोगुण के प्रभाव से झगड़ा कर लेता है। इस प्रकार तीन गुणों के प्रभाव से मानव जीवन नष्ट हो जाता है।


मनुष्य जीवन का केवल एक ही उद्देश्य है सत भक्ति करके मोक्ष प्राप्त करना सत भक्ति ना करने से 84 लाख योनियों में जीव को महान कष्ट उठाना पड़ता है

यदि तत्वदर्शी संत से ज्ञान सुनकर विश्वास के साथ नाम का जाप करें तो मानव जीवन सफल हो जाता है।
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